लोक कलाकारों ने गीत,नाटक एवं नृत्य के माध्यम
से ग्रामीणों को जल के प्रति कर रहे जागरूक
बांसवाड़ा जिले में दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन
अभियान के प्रति लोक जागरूकता के संदेश को
आमजन तक पहुंचाने के लिए गांवों में परम्परागत लोक गीतों के माध्यम से संदेश पहुंचा
रहे है। जिला प्रशासन एवं जलग्रहण विभाग के
संयुक्त तत्वावधान में वागड़ लोक कला एवं विकास सेवा संस्थान के संबंद्ध कला जत्थों
के लोक कलाकार गांव-गांव पहुंच कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के द्वारा जल संरक्षण के
लिए जागरूकता ला रहे हैं ।
पिछले दो दिनों में यहां हुए जल संरक्षण के लिए
जागरूकता कार्यक्रम
मुख्य कार्यकारी
अधिकारी रामनाथ चाहिल ने बताया कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार गढ़ी के लिए शिवनाथरावल
व दल, अरथूना के लिए प्रेमनाथ रावल व दल, तलवाड़ा के लिए बंशीलाल डामोर व दल, घाटोल
के लिए प्रकाश सारेल व दल, छोटी सरवन के लिए नारायणशंकर डामोर व दल, कुशलगढ़ के लिए
हकरू खड़िया व दल, सज्जनगढ़ के लिए शंभूसिंह डामोर व दल, गांगडतलाई के मोहनलाल डिडोंर
व दल, बागीदौरा के लिए प्रभूलाल निनामा व दल, आनंदपुरी के लिए बंशीलाल कटारा व दल तथा
बांसवाड़ा पंचायत समिति के लिए भैरूलाल हाड़ा व दलों द्वारा मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन
अभियान के संदेश पहुंचा रहे हैंं।
शुक्रवार
को पंचायत समिति बागीदौरा के गांव नयापडारिया, गांगडतलाई के खोडालीम, छोटी सरवन के
कुतबबारी, आनन्दपुरी के तारवा, अरथुना के इटाउवा, गढ़ी के पालोदा, घाटोल के हावड़ी, कुशलगढ़
के टिम्मेडा कला, तलवाड़ा के नोखला, सज्जनगढ़ के टोडी एवं पंचायत समिति बांसवाड़ा के गांव
खरवाली में तथा शनिवार को घाटीगड़ा, नवागांव, घोडी तेजपुर, कुंबा, केसरपुरा, भीमपुर,
मियासा, भरतगढ़, सागेता, टाडामंगला एवं नाथपुरा खूर्द में जल संरक्षण के लिए कला जत्थों
द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता लाने के प्रयास किए गए।
विद्यालयों में भी दिया जा रहा है जल संरक्षण संदेश
उन्होंने
बताया कि कार्यक्रमों के तहत प्रत्येक गांव में स्थित विद्यालय में प्रार्थना सभा में
विद्यालय प्रधानाचार्य के द्वारा बच्चों को जल का महत्व एवं उसकी उपयोगिता को बताते
हुए जल के बचाव के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही बच्चों को अपने माता-पिता, पडोसी,
रिश्तेदारों और गांव के निवासियों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने की अपील की जा रही है। इस मौके
पर कला जत्थों द्वारा लोकगीतों, कविताओं आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी
बच्चों को जागरूक किया जा रहा है।
इसके पश्चात्
गांव में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान जल संरक्षण की रैली निकालकर जल बचाव के
लिए नारों, स्लोगन आदि के माध्यम से गांव वालों को जागरूक करने के प्रयास किए जा रहे
है।
प्रभावी सांस्कृतिक कार्यक्रम से हो रहे है गांववासी
जागरूक ः
मुख्यमंत्री
जल स्वावलम्बन अभियान की मंशानुरूप जिला प्रशासन के निर्देशन में चिन्हित गांवों में स्थानीय कलाकारों के कला जत्थों द्वारा सायंकालीन
प्रस्तुत किए जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम गांव के निवासियों को बड़े ही रोचक ढ़ंग
से जागरुक कर रहे है। स्थानीय भाषा वागड़ी में प्रस्तुत जल की महत्ता, उपयोगिता, जल
के अपव्यय को रोकने, बारिश के पानी का संग्रहण कर उसका उपयोग पेयजल एवं सिंचाई के लिए
करने के लिए जागरूक करने वाले लोकगीतों, कविताओं, नाटकों, संवाद एवं नृत्य न केवल गांववासियों
के आकर्षण का केन्द्र बने हुए है साथ ही ये सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम अपने उद्देश्य
में सफल होते हुए आमजन को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने में भी सफल हो रहे है।
स्थानीय जनप्रतिनिधि भी कर रहे है प्रेरित ः
कला जत्थों
के द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों के दौरान संबंधित गांव के सरपंच, ग्राम सचिव तथा पंचायत
के सदस्य सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि भी उपस्थिति रहकर गांव वालों को जल संरक्षण
के लिए अपील का अभियान को सफल बनाने तथा अपने क्षेत्र में पेयजल एवं सिंचाई के लिए
पानी की समस्या को दूर करने का आह्वान कर रहे है। इन कलाकारों द्वारा चयनित गांवों
में प्रातः दस बजे स्थानीय विद्यालयों में रैली व बाल सभाओं के आयोजन में व अपराह्न
में आयोजित वार्ड सभाओं में तथा रात्रि में लोक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री
जल स्वावल्बन अभियान का लोक जागरण कर ग्रामीणों को जल के प्रति जागरूक करने का संदेश
संवाहक कर रहे हैं।
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